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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 210, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 210, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 210 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

या ध्याने ध्यातृलक्षाणां साध्वी भार्यात्वमागता । तत्कल्पनानुभवनं तेषां सत्त्वात्मनि स्थितम् ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

ब्रह्म के संकल्प के अनुसार ही शास्य (शासनयोग्य) पुरुष की पुण्यक्षेत्रों में उपार्जित पुण्य के अनुसार उसके फलभोगरूप प्रतिभा वैसे ही स्वप्न के समान उदित होती है जैसे कि पुण्यविपरीत पापवाले की नरकादि प्रतिभा उत्पन्न होती है