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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 210, Verse 10

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 210, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 210 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

गृहादनिर्गतो जीवः सप्तद्वीपपरः स्थितः । तस्यापि तत्काल्पनिकं राज्यं व्योम्नि स्वमन्दिरे ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

कैसी-कैसी प्रतिभा उदित होती हैं ? उनका उल्लेखमूर्वक निरूपण करते हैं। यह मैं आज अकेला ही मर गया, ये मेरे बन्धु-बान्धव सब जीते हैं, ये सब मेरे लिये रोते हैं, मैं यह अकेला ही परलोक में पहुँच गया हूँ