Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 211, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 211, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 211 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
जगत्ता चाजगत्ता च परस्यैवामलं वपुः ।
पराभिधानं च परं न च सत्परमार्थतः ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
पूर्ण परम ब्रह्म परमात्मा से पूर्ण जगत् का आविर्भाव होता हे । पूर्ण ही यह
स्थित है न तो इसका भान हुआ है ओर न अभान हुआ हे, किन्तु स्फटिक शिला के घनीभूत मध्य
के समान यह चिन्मात्रचन है