Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 211, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 211, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 211 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
स्वप्ने पुंसा मृतेनापि स्वदाहो दृश्यते यथा ।
असदेव सदाभासं जगद्दृष्टं परे तथा ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
शून्य,
पदार्थो की उपलब्धि, भान (सृष्टि), अभान (प्रलय), द्वित, अद्वेत, असत् ओर सत् सव कुछ परम
चिदाकाश ही है