Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 211, Verse 36
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 211, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 211 · श्लोक 36
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
^त्वयाऽर्थो देहशब्दस्य" से लेकर यहाँ तक मेरे द्वारा प्रतिपादित न्याय से जीवन्मुक्ति
सहित लोक, वेद आदि सारा जगत् ब्रह्म ही सिद्ध होता है, इसलिए यह मेरे द्वारा प्रतिपादित न्याय
परमपुरुषार्थ का साधन होने से ग्रहण करने योग्य हे