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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 211, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 211, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 211 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

एते लोकाः किलैतेषां नाभ्यासः स्थानदूरगाः । एते संकल्पलोकाख्या व्याप्तमेभिः किलाखिलम् ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे सकल ध्यान कर्ताओं का अपने अपने संकल्पानुसार चन्द्रत्व पृथक्‌ पृथक्‌ भासता हे