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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 212, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 212, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 212 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

श्रीराम उवाच । एतद्ब्रह्मन्कदा नाम तन्न चेतितवन्मुने । निरावृतमनाद्यन्तं किमिदानीं प्रचेतति ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

सिद्धां के लोक दो प्रकार के हैँ । एक तो हँ ये महदूलोक, जनोलोक, तपोलोक ओर सत्यलोक नामधारी.ये बहुत दूर हैं और दूसरे हैं सर्वत्र संचार करनेवाले सिद्धो के संकल्प से ()) बने हुए । वे संकल्पलोक कहलाते हैं ओर वे सर्वत्र हैं इनसे सारा विश्व व्याप्त है । उन दोनों प्रकार से सिद्ध लोकों के दर्शन में धारणाभ्यास ही कारण है ओर वह धारणाभ्यास आपको प्राप्त नहीं हे