Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 213, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 213, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 213 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
यत्तु वस्तुत एवास्ति न कदाचन किंचन ।
तदभावात्म तद्राम कथं नाम विनश्यति ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
चूँकि जगत् निर्विकार आदि-अन्त शून्य ब्रह्मरूप ही है, इसलिए जगत् की सदा ही ऐसी ही
सत्ता है कभी भी इससे विलक्षण सत्ता नहीं है, क्योकि विपश्चित् उपाख्यान में कही गई युक्ति के
अनुसार सकल जीवों के संसार के उच्छेद का अवसर प्रसिद्ध नहीं है