Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 213, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 213, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 213 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
गुरुरुवाच ।
पुत्र शेषमशेषेण दृश्यमाशु विनश्यति ।
यथा तथा स्वप्नपुरं सौषुप्तीं स्थितिमीयुषः ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
द्वित्व (भेद) है ? और जब द्विता का अभाव है तब एकता कहाँ ? क्योंकि एकता द्वित्व की अपेक्षा करती
है