Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 215, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 215, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 215 · श्लोक 23
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हिन्दी अर्थ
श्रीविश्वामित्रजी ने कहा : अहा ! हमारे लिए बड़े हर्ष की बात है कि हमने मुनि महाराज के
श्रीमुख से अत्यन्त पुण्यमय ज्ञान सुना है जिसके प्रभाव से हम लोग हजार बार गंगा में स्नान किये हुए से
अत्यन्त पवित्र होकर बैठे हैं