Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 215, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 215, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 215 · श्लोक 27
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हिन्दी अर्थ
श्री शत्रुघ्नजी ने कहा : भगवन्, आपके अनुग्रह से मैं निगतिशयआनन्दरूप जीवन्मुक्ति को प्राप्त
हो चुका हूँ, अत्यन्त प्रशान्त हूँ, परम पद को प्राप्त हो गया हूँ, सदा के लिए परिपूर्ण (प्राप्तकाम) हूँ,
केवल निरतिशय सुखस्वरूप हूँ