Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 215, Verse 28

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 215, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 215 · श्लोक 28

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

महाराज दशरथ ने कहा : अनेक जन्मों के संचित पुण्यो से परमज्ञानी मुनिश्रेष्ठ इन कुलगुरु महाराज ने हम लोगों को परमपावन तत्त्व अथवा अध्यात्मशास्त्र का उपदेश दिया, जिससे हम लोग परम पवित्र हो गये हें