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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 215, Verse 29

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 215, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 215 · श्लोक 29

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

श्रीवाल्मीकिजी ने कहा : हे भरद्वाज, जब राजा दशरथ के साथ सभा स्थित वे सभ्यगण इस प्रकार के प्रशंसा वाक्य कह रहे थे तब भगवान्‌ वसिष्ठजी ने ज्ञान से पावन वाणी से यह कहा