Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 215, Verses 36–39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 215, verses 36–39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 215 · श्लोक 36-39
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हिन्दी अर्थ
सुन्दर राजमहल में तथा खूब सजाये गये अतएव सुमेरु सदृश अयोध्या नगरी में विलासवती यौवनमत्त
कामिनियों ने घर-घर नाच किया