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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 215, Verse 47

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 215, verse 47 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 215 · श्लोक 47

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

राजा दशरथ के उत्सवरूपी यज्ञ में रंग बिरंग के कपड़े पहने हुए तथा उत्तम उत्तम माला धारण किये हुए परिचर ओर परिचारिकाएँ, जिनके शरीर से मनोहर गन्ध महक रही थी, इधर से उधर जा रही थीं