Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 215, Verse 48
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 215, verse 48 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 215 · श्लोक 48
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हिन्दी अर्थ
ताण्डव नृत्य करनेवाली स्त्रियाँ कपूर, अगरू, कस्तूरी और कंकोलमिर्च मिश्रित चन्दन
लगाकर खूब सजाये गये राजसभा के दूसरे आँगन में गई