Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 215, Verse 49
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 215, verse 49 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 215 · श्लोक 49
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हिन्दी अर्थ
महाराज दशरथ ने अविनाशी परमपद
को प्राप्त होकर बोधरूपी सूर्योदय हो जाने के कारण संसाररूपी कृष्णपक्ष की रात्रि का अन्त (विनाश)
होने से उत्पन्न हुए हर्ष से लगातार सात रात्रि तक पूर्वोक्त प्रकार का महान् उत्सव किया, जिसमें दान,
भोग और सजावट का अटूट बोलबाला था