Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 215, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 215, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 215 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
मोक्षोपायानिमान्पुण्यान्प्रत्यक्षानुभवार्थदान् ।
बालोप्याकर्ण्य तज्ज्ञत्वं याति का त्वादृशे कथा ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
महाराज दशरथ ने कहा : भगवन्, आपके उपदेश से हमारा आत्मा परम पद में सुख से
प्रवेश पाने योग्य बन गया है । अतएव संसाररूपी अत्यन्त दीर्घ दुर्गम मार्ग तय करने से चिरकाल से थके
हुए हम लोग आपके उपदेश श्रवण से जडता ओर मलिनता से रहित हो परम पद में पूर्णरूप से वैसे ही
विश्राम पा चुके हैं जैसे कि जल ओर कृष्णता (कालिमा) से रहित शरत्काल के मेघ हिमालय आदि
पर्वत पर विश्राम पाते हैं