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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 216, Verse 2

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 216, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 216 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

राजोवाच । भगवन्भवतो दृष्टिर्भवबन्धविनाशनी । आलोकितो यया चाहमुत्तीर्णोऽस्मि भवाम्बुधेः ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

वत्स, तुम भी इसी निर्दोष पूर्ण ब्रह्मात्मदुष्टि का दृढता से अवलम्बन कर सांसारिक सुखो से विरक्त सन्देहरहित जीवन्मुक्त शान्तबुद्धि होकर सुख से रहो