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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 216, Verse 24

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 216, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 216 · श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

स्वामिंस्तव प्रसादेन उत्तीर्णोऽहं भवाम्बुधेः । आपूरितजगज्जालं स्थितोस्मि गतसंशयः ॥ २४ ॥

हिन्दी अर्थ

भगवन्‌, आपके असीम अनुग्रह से निस्सन्देह हो मै भवसागर से पार होकर पूणनिन्दरूप से सम्पूर्ण जगज्जाल को व्याप्त कर स्थित हूँ इसमें कुछ भी संशय नहीं हे