Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 22, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 22, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 22 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
ये बद्धवासना मूढाः कर्म शंसन्ति तेऽनघ ।
श्रुतिस्मृत्युचितं तेन विनाबोधं प्रयान्ति ते ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
अन्न पुरुषों के लिए तो एकमात्र कर्म ही शरण हैं, यह कहते हैं ।/
हे निष्पाप श्रीरामजी, जो मूर्ख सांसारिक विषयवासनाओं में बँधे हुए रहते हैं, वे श्रुति एवं स्मृति
से प्रतिपादित उचित कर्म की प्रशंसा किया करते हैं तथा तत्वज्ञान के अभाव से उसी कर्म के द्वारा
फल का भोग पाते हैं