Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 22, Verse 32

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 22, verse 32 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 22 · श्लोक 32

संस्कृत श्लोक

अहमात्मा त्रिकोणत्वमुपगच्छति कल्पनम् । असदेव सदाभासं मन्यते चेतनाद्वपुः ॥ ३२ ॥

हिन्दी अर्थ

उस जीव के देहधारण का प्रकार बतलाते हैं । पिता के हृदय में वीर्यरूप से अवस्थित अहंकारात्मा जीव माता की त्रिकोणाकार योनि में पिता के द्वारा निषिक्त होकर त्रिकोणाकार परिच्छिन्न कल्पना को प्राप्त होता है । तदनन्तर उस योनि में स्थित रक्त से मिल करके कललबुद्बुद्‌ तथा पिण्ड आदि आकार-क्रम से आविर्भूत हो असद्रूप शरीर में सद्‌आकार अहम्‌" इत्याकारक अभिमान को चेतन होने के कारण मानने लग जाता है