Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 23, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 23, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 23 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
इति संचिन्त्य सोऽग्रस्थं किरातग्रामकं यदा ।
प्रवेष्टुमिच्छति तदा मया प्रोक्तमिदं वचः ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
ऐसा विचारकर जब वह आगे स्थित किराता के एक छोटे-से गाँव में प्रवेश करने की
इच्छा कर रहा था, तब तक मैंने उससे यह बात पूछ दी (७)