Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 23, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 23, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 23 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
तत्तावदेवमग्रस्थं ग्रामकं प्रविशाम्यहम् ।
श्रममत्रापनीयाशु वहाम्यध्वानमाशुगः ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिए छोटे-से इस अगले गाँव में प्रविष्ट
होकर कुछ देर तक रहूँ । यहीं पर जल्दी थकावट मिटाकर फिर शीघ्रगामी मैं अपना रास्ता पकड़
लूंगा