Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 23, Verse 10

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 23, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 23 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

सुगलन्तीव मर्माणि स्फुरतीवाग्निरातपे । संकुचत्पल्लवापीडास्ताप्यन्ते वनराजयः ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

सभी अंग एक तरह से गलते जा रहे हैं, इस ताप में मानों अग्नि प्रदीप्त हो रही है तथा संकुचित हो रहे पल्लवोंवाली वनराजियाँ सन्तप्त हो रही हैं