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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 23, Verse 24

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 23, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 23 · श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

पान्थ उवाच । भगवन्कोऽसि पूर्णात्मा महात्मा कथमात्मवान् । पश्यस्यनाकुलो लोकं ग्रामयात्रामिवाध्वगः ॥ २४ ॥

हिन्दी अर्थ

उस पथिक ने कहा : भगवन्‌, आप कौन हैं ? आप पूर्णात्मा आत्मज्ञानी कोई महात्मा प्रतीत हो रहे हैं, क्योंकि आप अनाकुल होकर इस लोक को ऐसे देख रहे हैं, जैसे कोई पथिक ग्रामयात्रा को देखता हो