Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 23, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 23, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 23 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
भूसंस्थोऽपि समस्तानां लोकानामुपरीव खे ।
संस्थितोऽसि निरास्थोऽसि घनास्थोऽसीव लक्ष्यसे ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
आप पृथिवी पर स्थित
हुए भी समस्त लोकों के ऊपर आकाश में स्थित-से हैं । आस्थाशून्य रहते हुए भी आप मेरे
समान लोगों का उद्धार करने में सघन आस्था से युक्त-से मुझे प्रतीत हो रहे हैं