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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 23, Verse 3

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 23, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 23 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

अहं कदाचिदाकाशकोशादवनिमागतः । भवत्पितामहार्थेन केनाप्युपनिमन्त्रितः ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

किसी समय पहले आपके पितामह अज ने किसी यज्ञादि रूप कार्य से मुझे निमन्त्रण दिया था, इसलिए आकाशमण्डल से इस पृथिवी पर मैं आया