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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 23, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 23, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 23 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

विहरन्भूतलं गच्छंस्त्वत्पितामहपत्तनम् । प्राप्तोऽस्मि कामप्यादीर्घामरण्यानीं महातपाम् ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

आपके पितामह की नगरी अयोध्या में आ रहा मैं पृथिवी पर विचरते हुए महान्‌ आतपों से युक्त किसी एक बड़े महाजंगल में पहुँच गया