Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 23, Verse 30
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 23, verse 30 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 23 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
कलावानकलङ्कोऽन्तःशीतलो भास्वरः समः ।
रसायनभरापूर्णः पूर्णेन्दुरिव राजसे ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
ओर दूसरा भी चन्द्रमा के साथ साम्य तथा विशेषता बतलाते हैं ।
मुने, आप कलावान्, कलंकशून्य, भीतर से शीतल, प्रकाशमय, समरूप तथा रसायनप्रवाह
पूर्ण, पूर्ण चन्द्रमा के सदृश भासते हैं (&)