Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 23, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 23, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 23 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
अथ तस्यामरण्यान्यां यावत्प्रविहराम्यहम् ।
तावत्पश्यामि पुरतो वदन्तं पथिकं श्रमात् ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
उस महाजंगल में पहुँचने के बाद ज्यों ही मैं इधर-उधर विहार करने में प्रवृत्त
हो रहा था, त्यों ही श्रम के मारे एक पथिक को कुछ कहते देखा