Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 24, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 24, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 24 · श्लोक 11
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हिन्दी अर्थ
दुग्हारा कर्मो से ही उद्धार क्यों नहीं हो सकता; इस आशंका फर कहते हैं /
जो कुछ मैंने नित्य-नैमित्तक कर्म किया है वह पूर्वजन्म के दुष्कर्म की राशि में निमग्न हो
गया तथा भोगवासनारूपी बीज तो उत्तरोत्तर अनर्थ के हेतुभूत काम्यनिषिद्ध कर्म में ही मुझे
प्रवृत्त करता है