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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 24, Verse 12

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 24, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 24 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

जीवितं च जने जीर्णं नैवोत्तीर्णो भवार्णवः । दिनानुदिनमुच्छूना भोगाशा भयदायिनी ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

पुत्र, कलत्र, बान्धव, चाकर आदि मेँ आसक्ति रखने से यह जीवन भी जीर्ण हो चला, परन्तु हे भगवन्‌, मे संसारसागर के पार न पहुँचा तथा भयदायिनी मेरी भोगों की आशा दिनों-दिन बढ़ती ही जाती हैं