Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 24, Verse 2

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 24, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 24 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

मङ्किरुवाच । भगवन्भूरिशो भ्रान्ता दिशो दश दृशो यथा । मया न तु पुनः साधुर्लब्धः संशयनाशकृत् ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

मंकि ने कहा : हे भगवन्‌, संशय के उच्छेद के लिए उपदेश देने में कुशल साधु पुरुष के अन्वेषण में तत्पर हो मैंने दसो दिशाओं में, दृष्टियों की नाई, खूब भ्रमण किया, परन्तु संशय का विनाशक कोई सज्जन पुरुष मुझे न मिला