Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 24, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 24, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 24 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
मनः पिप्पलपल्यूलैरिव कुग्रामकोटरम् ।
वासनाङ्गवहैर्गृध्रैर्नित्यं पापीयसी स्थितिः ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
इसमें दृष्टान्त बतलाते है /
हे मुने, मेरा यह मन पीपल आदि के उड़ रहे सूखे पत्तों आदि के संचय से गन्दे गाँवों के
मध्य भाग की नाई हो गया है तथा मेरी जीविका भी नानाविध भोगवासनारूपी दुर्गन््धों को अपने
अंग में धारण करनेवाली गीधतुल्य इन इन्द्रियों द्वारा निकृष्ट गन्दे गाँव की स्थिति-सी हो गयी
है