Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 25, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 25, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 25 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
यदि काष्ठोपलादीनां न भवेद्बोधरूपता ।
तत्सदानुपलम्भः स्यादेतेषामसतामिव ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
काष्ठ आदि दृश्य पदार्थों का स्फुरण के साथ अभेद न मानने पर खरगोश के सीय के समान
उनका अत्यन्त अस॒त्त्त ही हो जायेगा, यह कहते हैं ।
यदि लकड़ी, पत्थर आदि को बोधरूप न माना जाय, तो उनका खरगोश के सींग के सदृश,
कभी ज्ञान ही, नहीं हो सकेगा