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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 25, Verse 19

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 25, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 25 · श्लोक 19

संस्कृत श्लोक

अन्योन्यानुभवो ह्यैक्यमैक्यं त्वन्योन्यवेदनम् । यथाम्भसोः क्षीरयोर्वा न काष्ठजतुनोरिव ॥ १९ ॥

हिन्दी अर्थ

दूध और जल की नाई अन्योन्य एक रूप बन जाना ही एकता है। द्रष्टा और दृश्य पदार्थों का भी अन्योन्य ज्ञानरूप ऐक्य विद्यमान है ही लाख और काठ की नाई अन्योन्य संयोगमात्र नहीं है