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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 25, Verse 22

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 25, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 25 · श्लोक 22

संस्कृत श्लोक

ममेदमिति बन्धाय नाहमित्येव मुक्तये । एतावन्मात्रके वस्तुन्यात्मायत्ते किमज्ञता ॥ २२ ॥

हिन्दी अर्थ

अहन्ता त्याग होने पर ममता स्वयं ही त्यक्त हो जाती है. यह कहते हैं । “यह मेरा है” यह ममता ही बन्धन प्रदान करती है और 'में नहीं हूँ” यह ममता का अभाव मुक्ति प्रदान करता है । जब इतनी वस्तु अपने अधीन हो जाय, तब अज्ञान ही कहाँ रहा ?