Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 25, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 25, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 25 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
चन्द्रद्वयप्रत्ययवन्मृगतृष्णाम्बुबुद्धिवत् ।
किमनुत्थित एवायमसदेवाहमुत्थितः ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
इसी विष्य का उपपादन करते हैं /
एक चन्द्र में दो चन्द्रमा की बुद्धि या मृगतृष्णा में जलबुद्धि के समान यह असत् अहंकार क्या
उत्पन्न हुआ है ? उत्पन्न हुआ ही नहीं है