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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 26, Verse 12

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 26, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 26 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

तव नावहितं चित्तं कामः कवलयिष्यति । सावधानस्य बुद्धस्य पिशाचः किं करिष्यति ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि तुम्हारा चित्त विवेक और अवधान से युक्त नहीं है, तो उसे कामरूप पिशाच अपने वश में कर लेगा । परन्तु जो सावधान और सदा जागरूक है, उसके चित्त का वह कामरूप पिशाच क्या करेगा ?