Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 26, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 26, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 26 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
पर्यालोचनमात्रेण बन्धगन्धो न बाधते ।
गच्छतो मार्गवैषम्यमिवालोकनकारिणः ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
केवल विवेकमात्र से संसार की
गन्ध ऐसे निकल नहीं सकती जैसे केवल अपने पैर रखने की जगह पर दृष्टि रखनेवाला गमनकर्ता
पुरुष मार्ग की विषमता नहीं निकाल सकता