Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 26, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 26, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 26 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
यथाक्षिसंवृतिः सर्वरूपालोकशमोऽरिहन् ।
संवित्संवरणं नाम सर्वदृश्यशमस्तथा ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे कामादि शत्रुओं के नाशक, जैसे आँख का आवरण सभी रुप के
प्रकाश की शान्ति है, वैसे ही बहिर्मुख ज्ञान का आवरण यानी बाह्य ज्ञानों को आत्माकी ओर
लगाना समस्त दृश्यों की शान्ति है