Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 26, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 26, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 26 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
अहंत्वोल्लेखतः सत्ता भ्रमभावविकारिणी ।
तदभावात्स्वभावैकनिष्ठता शमशालिनी ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
ऐसी स्थिति में जो निष्कर्ष निकला, उसे बतलाते हैं /
अहन्ता की लकीर जब ब्रह्मसत्ता में आ जाती है, तभी संसारभ्रमरूप विकार पैदा करती
है और जब वह लकीर हट जाती है, तभी वह शान्ति प्रदान करती है तथा अपनी स्वरूपावस्था
को प्राप्त हो जाती है