Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 26, Verse 36
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 26, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 26 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
अपेक्षैव घनो बन्ध उपेक्षैव विमुक्तता ।
सर्वशब्दान्विता तस्यां विश्रान्तेन किमीक्ष्यते ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
सर्वान्वित
अपेक्षा यानी सभी विषयों की अभिलाषा ही दृढ बन्धन है ओर सभी तरह की इच्छाओं का
परित्याग ही मुक्ति है । ऐसी स्थिति में जो पूर्णकामता में विश्रान्त हो चुका है, वह क्या
चाहेगा ?