Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 26, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 26, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 26 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
मङ्किनेति श्रुतवता ततो मोहो महानपि ।
अशेषेण परित्यक्तस्तत्रैव त्वगिवाहिना ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
मुख्य अधिकारी होने के कारण भिर्फ़ एक बार उपयुक्त विषयों के श्रवण से ही मकिकी
मोहनिवृत्ति हो यह यह कहते हैं ।
इस तरह के मेरे उपदेश को सुनते ही उस मंकि ब्राह्मण ने अपने असीम महान मोह को भी
उसी समय, पूर्णरूप से ऐसे छोड़ दिया, जैसे सर्प अपनी केंचुल को छोड़ देता है