Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 26, Verse 40
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 26, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 26 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
प्रवाहापतितं कार्यं कुर्वतापास्तवासनम् ।
तेन वर्षशतस्यान्ते स्थितमद्रौ समाधिना ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
प्रारब्धवश
से जो कुछ भी समय-समय पर कर्तव्य आ जाता था, उसे वह वासना छोड़कर करता हुआ सौ वर्षों
के बाद उसी पर्वत पर समाधि में स्थित हो गया