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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 26, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 26, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 26 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

लब्धमाप्राणपर्यन्तंभमनुज्झतोः । आमिषं को वि वद माकरमूढयोः ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

भद्र, कहो मछली और मूर्ख (अज्ञानी) में क्या अन्तर है ? ये दोनों मरणपर्यन्त पकड़े हुए अभिलाषारूपी विषयों को नहीं छोड़ते, (मछली के पक्ष में कसी में लगाया गया आमिष ओर मूर्ख के पक्ष मे रागादिविक्यरूप आमिष समझना चाहिए) चाहे वह शुभ हो या अशुभ