Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 28, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 28, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
संवित्स्पन्दो वासनावानिह बीजमकारणम् ।
भूत्वा कारणतामेति देहादेरङ्कुरावलेः ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
यद्यपि संवित् का स्पन्दन वास्तव में अकारण है, तथापि यहाँ वासना से युक्त होकर देह आदि
अंकुरों का वह कारणरूप बीज बन जाता है