Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 28, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 28, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
हिमं यत्तद्यथा शैत्यं यच्छैत्यं तद्यथा हिमम् ।
यत्कर्मासौ तथा जन्तुर्यो जन्तुः कर्म तत्तथा ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, जो हिम है वही जैसे शीतता है ओर जो शीतता हे,
वही जैसे हिम है, वैसे ही जो कर्म है वही पुरुष है ओर जो पुरुष है वही कर्म है, इसलिए किये जानेवाले
पुण्य-पाप भावि देह और उस देह से जो भोम्य होनेवाला है इन दोनों की पूर्वावस्था है