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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 28, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 28, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

कर्मैव पुरुषो राम पुरुषस्यैव कर्मता । एते ह्यभिन्ने विद्धि त्वं यथा तुहिनशीतते ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामजी, कर्म ही पुरुष है और पुरुष में ही कर्मरूपता है, आप इन दोनों की हिम ओर शीतता की नाई अभिन्नरूपता ही जानिए